अखंडा मूवी रिव्यू । Akhanda Movie Review in Hindi [2022]

कुछ फ़िल्में होती हैं जो दिमाग के लिए नहीं बल्कि दिल के लिए बनी होती हैं, पूरे 2 घण्टे असली दुनियाँ को भूल के आप एक दूसरी दुनियाँ में पहुँच जाते हो।

सीटी मारो, ताली बजाओ, सारी टेंशन भूल जाओ, इसको बोलते हैं मास सिनेमा जो हमारी इंडियन फ़िल्म इंडस्ट्री की पहचान रहा हैं।

एंटरटेनमेंट, जिसके लिए लोग टिकट खरीदकर थिएटर में पहुँच जाते हैं लेकिन आज इस मास सिनेमा को में आपके घर पर ही लेके आ गया हूँ, ना बाहर जाने की टेंशन ना टिकट खरीदने की।

Akhanda, ये वो फ़िल्म हैं जिसमें दिमाग तो बिल्कुल नहीं लगाना आपको लेकिन दिल शत प्रतिशत खुश हो जाएगा आपका भारत में ऐसी फिल्में बनती देखकर।

बॉलीवुड से तो ऐसी फिल्म की उम्मीद लगाना बेकार हैं क्योंकि हम गहराइयाँ में अटके हैं तो वहाँ Pushpa पूरी दुनियाँ में राज कर रहीं हैं।

बस उसी तेलुगु इंडस्ट्री से ढूँढकर लाया हूँ इस खजाने को।

शिव, इनके आगे बड़े बड़े झुक जाते हैं, अपनी एक आँख से पलक झपकते ही पूरी दुनियाँ को ख़त्म कर सकतें हैं ये।

लेकिन कभी सोचा हैं आपने, जिस मूर्ति के आगे सिर झुकाते हो उसमें से खुद शिव बाहर निकलकर धरती पर आ जाएं तो फिर क्या होगा? तांडव, सर्वनाश या फिर मौत का नंगा नाच।

जवाब मिलेगा Akhanda फ़िल्म में।

Akhanda Movie Review in Hindi

Akhanda Cast (स्टार कास्ट)

फ़िल्म का लीड कैरेक्टर हैं अखंडा रुद्र सिकन्दर अघोरा उर्फ़ अखंडा जिसे निभाया हैं नंदामुरी बालकृष्ण ने। फ़िल्म में इनके डबल रोल हैं जहाँ दूसरा रोल मुरली कृष्णा के रूप में प्ले कर रहें हैं जो एक अस्पताल चलाते हैं।

दूसरा अहम किरदार वरदा राजुलु का हैं जिसे निभाया हैं श्रीकांत ने। वरदा एक खदान के मालिक हैं जो की एक विलेन का किरदार हैं।

फ़िल्म में वरदा के साथ एक बाबा भी हैं अघोरा बाबा जिसका किरदार जगपथी बाबू निभा रहें हैं।

जबकि सरन्या बचुपल्ली एक आईएएस का किरदार हैं जिसे प्रज्ञा जायसवाल निभा रहीं हैं।

इसके अलावा नितिन मेहता ने गजेंद्र साहू का और पूर्णा ने पद्मावती का किरदार निभाया हैं जहाँ पद्मावती का कैरेक्टर एक प्रिंसिपल सेक्रेटरी का हैं।

Akhanda Movie Story in Hindi (कहानी)

जंगल के बीचों बीच एक खदान मौजूद हैं जहाँ कॉपर की खुदाई की जाती हैं। लेकिन ये सब दुनियाँ को दिखाने के लिए हैं असलियत में यहाँ से यूरेनियम को ढूँढकर निकाला जा रहा हैं।

यूरेनियम को इस तरह समझ लो आप की ये सबसे खतरनाक पदार्थ हैं जिसका इस्तेमाल न्यूक्लियर हथियार बनाने के लिए किया जाता हैं, एक न्यूक्लियर बम जिससे पूरी दुनियाँ को हिलाया जा सकता हैं।

इस खदान के राजा हैं वरदा, जिसके नाम से पूरा शहर काँपता हैं। पुलिस से लेकर नेताजी की सफेद टोपी और मोटा पैसा बनाने वाले बिजनेसमैन, सब इनके सामने सिर झुकाते हैं।

लेकिन वरदा का सिर सिर्फ एक इंसान के सामने झुकता हैं – बाबाजी, इनके पास हैं जादुई शक्ति जिससे ये लोगों का भविष्य देख लेते हैं और हाँ, बाबाजी के पास काली शक्तियाँ भी हैं।

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पूरी एक टीम हैं इनकी जो किसी भी इंसान को परेशान से लेकर श्मशान तक पहुँचाने का तंत्र मंत्र जानते हैं।

अब कहानी में ट्विस्ट ये हैं कि वरदा की खदान से जो यूरेनियम निकलता हैं उसकी रेडिएशन से आसपास वाले गांवों में रहने वाले लोग बुरी तरह बर्बाद हो रहें हैं, दिमागी और शारीरिक दोनों रूप से।

बस यहाँ entry होती हैं कहानी के हीरो की, मुरली कृष्णा। ये उस अस्पताल के मालिक हैं जहाँ गरीब लोग खदान की रेडिएशन से बीमार होकर जिंदगी और मौत के बीच लड़ाई लड़ रहें हैं।

मुरली भईया वरदा को खुल्लमखुल्ला चैलेंज करने जाते हैं की खदान बन्द करो वरना पीट पीट कर बन्द करवा दी जाएगी।

लेकिन बाबाजी का पॉवर और काली शक्तियाँ हीरो को 2 मिनट में ही कहानी से गायब कर देती हैं। वरदा की खदान को रोकने वाला अब कोई नहीं बचा। लोग मरेंगे तो मरते रहें।

बस तभी फ़िल्म में entry होती हैं एक साए की, इंसान हैं या भूत, कोई नहीं जानता।

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शक्ल हूबहू मुरली कृष्णा से मिलती हैं लेकिन वो बेचारे तो पुलिस की कस्टडी में हैं तो फिर ये बन्दा आख़िर हैं कौन?

ये हैं अखंडा, जो खुद को शिव बोलते हैं हाथ में त्रिशूल लिए जो हथियार हैं इनका। इनके बारे में एक जरुरी बात जो आपको जान लेनी चाहिए, ये मौत से नहीं डरते बल्कि मौत इनसे डरती हैं।

अब बॉस, होगा भयंकर मुकाबला, एक तरफ़ अखंडा और उनका त्रिशूल तो दूसरी तरफ़ बाबाजी और उनकी काली शक्तियाँ और साथ में वरदा भी हैं जो किसी इंसान के रूप में शैतान से कम नहीं हैं।

लेकिन एक जरुरी सवाल आपने पूछा ही नहीं। मुरली कृष्णा और अखंडा दोनों एक जैसे क्यों दिखते हैं? इन दोनों के बीच में क्या कनेक्शन हैं?

क्या सच में शिव धरती पर उतर आएं हैं, अगर हाँ तो उनका मकसद क्या हैं?

या फिर अखंडा जो सामने से दिखता हैं वो अंदर से कुछ ओर ही हैं। क्या हैं इसका सीक्रेट मिशन?

देखो बॉस, मास सिनेमा कैसा बनना चाहिए उसका परफेक्ट उदाहरण हैं Akhanda फ़िल्म।

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Action, emotion, devotion तीनों का ख़तरनाक जोड़ हैं ये फ़िल्म जिसको जिंदगीभर याद रखोगे आप।

कुछ scenes तो visually इतने ज्यादा आकर्षक लगते हैं कि सच में चौंक जाओगे आप। अपने इंडियन सिनेमा में भी इस लेवल की creativity मौजूद हैं क्या? भरोसा नहीं होगा।

अभी देखो बॉलीवुड Akhanda का रीमेक बनाके इसका पूरा क्रेडिट चुरा ले उससे पहले जाके इसको देख डालो।

मजा आए तो दोस्तों को भी दिखाना। हॉटस्टार पर मिल जाएगी ये आपको। मैंने बोला था ना कि सीधा घर पर ही ले आया हूँ थिएटर।

देखकर बताना जरूर फ़िल्म कैसी लगी?

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