Bob Biswas Movie Hindi Review: अभिषेक बच्चन

अगर सस्पेंस थ्रिलर फिल्में देखना पसंद है‌, वो भी बॉलीवुड की, तो भईया एक नाम आपने जरूर सुना होगा, कहानी।

ये उन गिनी- चुनी फिल्मों में से एक है, जो किसी भी चालाक इंसान का घमंड तोड़ सकती है।

आंखों में आंखें डाल कर झूठ बोलती है यह फिल्म, और हम फिर भी बड़े प्यार से उल्लू बनते चले जाते हैं।

इस फ़िल्म में एक कैरेक्टर था, बॉब बिस्वास, याद हैं आपको?

अपनी हीरोइन की जान लेने आया था, और बदले में ऑडियंस को अपना फेन बना कर चला गया।

सच-सच बताना, तब दिमाग में खयाल आया था? काश इस बंदे की बैक स्टोरी सुनने का मौका मिलता और इसके ऊपर फिल्म बनती तो मजा आ जाता, तो बस आपने बोला और दुआ भूल हो गई।

आज हम बात करने वाले हैं नई फ़िल्म बॉब बिस्वास की, जो हाल ही Zee5 पर रिलीज़ हुई हैं।

Bob Biswas Movie Review in Hindi

Bob Biswas Movie Hindi Review: स्टोरी

अपना हीरो वापस आया है एक एक्सीडेंट के बाद, पूरे आठ साल कोमा की वजह से होस्पिटल को बाय बाय बोल कर।

बस दिक्कत ये है की बॉब का दिमाग भुलक्कड़ बन गया है, बंदे की यादाश्त गायब हो चुकी है जैसे मान लो यह आज ही पैदा हुए हैं।

पुराने लोग भी नये से लगते हैं और नये वालों से एकदम एलियन जैसी फीलिंग आती है।

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लेकिन कहानी में ट्विस्ट लेकर आते हैं दो बंदे, जो बॉब पर दिन से रात तक चौबीस घंटे नजर रखते हैं और अचानक एक शाम, कार में किडनैप करके उसकी मुलाकात एक कड़वे सच से करवाते हैं।

दरअसल बॉब बिश्वास कोई मामूली इंसान नहीं है यह एक चलती फिरती किलिंग मशीन है।

एक ऐसा सीरियल किलर जिसका निशाना आज तक कभी खाली नहीं गया, जैसे क्रिसमस पर सेंटा बच्चों को गिफ्ट बांटते हैं अपना बॉब, बच्चा हो या बुढ़ा, सब को गिफ्ट में मौत बाँटता है।

और अब बारी है बॉब कि वापस काम पर लौटने की जो इकलौता रास्ता है अपनी खोई हुई यादों को वापस पाने का।

जिसके बाद क्या सच है क्या झूठ? धीरे-धीरे उस पर से पर्दा हटना शुरू हो जाता है।

देखो बॉस, फिल्म मजेदार है क्योंकि इसका कांसेप्ट काफी नया हैं ओरिजिनल एन्ड दमदार।

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ना तो यह किसी साऊथ फिल्म का रीमेक है और ना ही बायोपिक बनाकर पैसा छापने का शॉर्टकट।

सबसे आसान होता है किसी भी कहानी में हीरो विलेन के बीच में से एक साइड चुनना, लेकिन जब हीरो ही विलेन है और विलेन ही हीरो, तो फिर आप साइड लोगे किसकी?

एक ऐसा बंदा जो सिर्फ टाइमपास के लिए लोगों की जान लेता है, और तड़पा-तड़पा के उनको नर्क यात्रा पर भेजता है, वो किसी कहानी का हीरो कैसे हो सकता है?

एक नेगेटिव कैरेक्टर को सेंटर पर डालकर, उसके चारों तरफ पॉजिटिव कहानी लिखना, इसको बोलते हैं टॉप लेवल की क्रिएटिविटी, जिसकी जरूरत बॉलीवुड को फिलहाल सबसे ज्यादा है।

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दूसरा कमाल है डायरेक्शन का, मतलब किसी इंसान की ट्रेजेडी में कॉमेडी ढूंढ कर बाहर निकालना, यह सबसे कठिन काम होता है।

इधर ताजा-ताजा लाल खून पड़ा है और आप से हँसी कंट्रोल नहीं हो रही, मतलब किसी की मौत को भी लाफ्टर चैलेंज में बदल देना ये चीज फ़िल्म को स्पेशल बना देती है।

डायरेक्शन का एक कमाल यह भी है कि यह फिल्म पूरे दो घंटे ऑडियंस को कहानी में हीरो की जगह खड़ा होने को मजबूर कर देती है, पूछो कैसे?

क्योंकि वो बेचारा मैमोरी लोस का शिकार धीरे-धीरे हर एक चीज समझता है, वैसे-वैसे हम भी सब कुछ सीखते जाते हैं।

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उसकी आंखों से दुनियाँ को समझना, फिर कौन अच्छा है कौन बुरा? उसके बारे में फैसला करना।

इससे होता ये है कि आप बॉब बिस्वास के कैरेक्टर में खुद को देखने लग जाते हो, और फिल्म की कहानी से पर्सनली जुड़ जाते हो, तो बॉब की फीलिंग आपकी फीलिंग, आपकी फीलिंग बॉब कि फीलिंग।

लास्ट में आते हैं सरप्राइजेज, मतलब ऐसे-ऐसे ट्विस्ट एंड टर्न्स जिनके बारे में आप सोच भी नहीं सकते।

वो कैरेक्टर जो आपको लगेगा की ये एन्ड में मास्टरमाइंड निकलेगा, वो अगले सीन में ख़तम, फीनिश।

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और वो जिसपे तरस आता है, बाहर से एकदम शरीफ, भोले भाले मासूम, इतनी जल्दी रंग बदलते हैं की आपके होश उड़ जाएंगे।

इस फिल्म में ऐसा कुछ नहीं है जो हो नहीं सकता, कोई भी टपक जाएगा या कोई भी अमर हो जाएगा।

आप जो सोचोगे वह तो बिल्कुल नहीं होने वाला, शर्त लगा लो।

Bob Biswas Movie Hindi Review: एक्टिंग और परफॉर्मेंस

अभी सीधा अभिषेक बच्चन, क्या मस्त कलाकार है ये बंदा, एकदम सॉलिड परफॉर्मेंस।

क्या कम बैक किया है अभिषेक ने पिछले कुछ टाइम में, सच बोलूं यह बॉलीवुड के सबसे अंडररेटेड एक्टर बन गए हैं।

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बॉब का कैरेक्टर पहले ही सास्वता सर प्ले कर चुके थे कहानी फ़िल्म में और वो लेजेंड है।

उनके कैरेक्टर को दोबारा प्ले करने के लिए हिम्मत चाहिए। लेकिन अभिषेक ने पूरी कोशिश की है कि आपकी यादों से वो पुराना चेहरा परमानेंट गायब हो जाए।

और बॉब कि जब-जब आपको याद आए तो सिर्फ उनका चेहरा आपके दिमाग में प्रकट हो।

बैंगोली लहज़े से लेकर एक अनयूजुअल ट्रांसफॉरमेशन, फिर सीरियस डार्क कैरेक्टर में खुद को बेचारा प्रजेंट करना।

इतना कठिन रोल, जूनियर बच्चन हंसते-हंसते खेल गए, दिल से रेस्पेक्ट है बॉस।

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लेकिन सिर्फ अभिषेक नहीं, अगर बैठे-बैठे फिल्म के थ्रू आप कोलकाता शहर पहुंच गए हो तो उसका क्रेडिट सपोर्टिंग एक्टर्स को जरूर जाना चाहिए, जिनके सीन्स तो छोटे हैं लेकिन नेचुरल और दमदार।

ये बंगाली एक्टर्स इतने परफेक्ट तरीके से कहानी में कोलकाता वाला फ्लेवर ऐड करते हैं, कि लैंग्वेज हिंदी होने के बावजूद आपको ऐसा लगेगा, जैसे रीजनल सिनेमा की कोई बढ़िया फिल्म देख ली हो।

Bob Biswas Movie Hindi Review: रेटिंग

तो यहां मेरी तरफ से बिना किसी शक के बॉब बिस्वास फ़िल्म को मिलेंगे पांच में से चार स्टार्स।

एक स्टार, दिमाग से खेलने वाले डायरेक्शन के लिए तो दूसरा चालाकी से रिवर्स गियर में चलने वाली कहानी के लिए।

तीसरा अभिषेक एवं सपोर्टिंग टीम कि जबरदस्त दमदार एक्टिंग के लिए तो लास्ट चौथा वाला ट्रेजेडी को कॉमेडी में बदलने वाले काफी इंटरेस्टिंग स्क्रीन प्ले के लिए।

बात करूँ नेगेटिव्ज की तो हाफ स्टार कटेगा फिल्म की थोड़ी सी स्लो रफ्तार के लिए, मतलब तसल्ली से देखना पड़ेगा इसको।

बिल्डअप होने में टाइम लगेगा, झटपट फटाफट कुछ नहीं मिलने वाला और हाफ स्टार बॉब विश्वास की एक्चुअल कहानी, वो क्या है?

वो सीरियल किलर बना कैसे? इसको पूरा इग्नोर मारते हुए सिर्फ और सिर्फ उसका प्रेजेंट दिखाना, कुछ सवाल अधूरे ही रह गए, इनकंप्लीट।

आगे फिल्म देखो और खुद जान लो। काफ़ी टाइम बाद एक मस्त थ्रिलर फिल्म आई है जिसको पूरी फैमिली के साथ इंजॉय कर सकते हो, बिना किसी टेंशन देख डालो।

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