Chehre Movie Review in Hindi: एक नए कॉन्सेप्ट पर आधारित नई फिल्म

एक बढ़िया थ्रिलर फिल्म से आप क्या उम्मीद करते हो?

दिमाग घूमाने वाले सस्पेंस, चोर को हीरो और हीरो को चोर साबित करने वाली चालाक एक्टिंग, इमोशन्स और अतीत में छिपा कोई डार्क सीक्रेट लिए तैयार की गई एक स्ट्रॉन्ग और जबरदस्त कहानी।

बॉस ये तीनों शर्ते पूरी हो गयी हैं, शिकायत का मौका नहीं मिलेगा।

बॉलीवुड में नया माल आया हैं, मजेदार भी और चालाक भी, लेकिन साथ में कुछ कमियाँ भी हैं।

Chehre, दिमाग से छेड़छाड़ करने वाला अनुभव जिसको बनाने की कोशिश करने की हिम्मत के लिए तालियाँ जरूर बजेंगी लेकिन झूठी तारीफों की उम्मीद हमसे ना लगाना क्योंकि गुस्सा भी निकलेगा थोड़ा।

तो फिर इंतज़ार किस बात का? करते हैं Chehre फ़िल्म का रिव्यू और जानते हैं कि इसको अपना कीमती वक्त देना सही होगा या नहीं।

Chehre Movie Review in Hindi

Chehre Cast (स्टार कास्ट)

अमिताभ बच्चन – एडवोकेट लतीफ़ ज़ैदी (पब्लिक प्रोसिक्यूटर)
इमरान हाशमी – समीर मेहरा (बिजनेस टाइकून)
अन्नू कपूर – एडवोकेट परमजीत सिंह भुल्लर (रिटायर्ड डिफेंस काउंसल)
समीर सोनी – जी. एस. ओसवाल
धृतिमान चटर्जी – रिटायर्ड जज जगदीश आचार्य
रघुबीर यादव – हरिया जाधव (रिटायर्ड जल्लाद)
क्रिस्टल डिसूजा – नताशा ओसवाल (समीर की लवर)
रिया चक्रवर्ती – अन्ना मैथ्यूज़
सिद्धान्त कपूर – जो कॉस्ट (हत्या का पूर्व आरोपी जो असल में अन्ना का भाई हैं)
एलेक्स ओ’नील – रिचर्ड अलेक्जेंडर

Chehre Story (कहानी)

एक अमीर बिजनेसमैन बर्फ़ के बीच फँस गया तो उसे मदद मिली एक अजीब से घर में जहाँ रहने वाले लोग ओर भी ज्यादा अजीब हैं।

सबका intro तो नहीं हो पायेगा लेकिन ये लोग कानून के रखवाले हैं, कानून के हाथ लम्बे होते हैं इस तरह की बातों से इनका सीधा कनेक्शन हैं।

लेकिन कहानी का center of attraction हैं एक मजेदार खेल जो इन लोगों का पसंदीदा हैं – ऑर्डर ऑर्डर करने वाला हथौड़ा।

साथ में अदालत वाले स्टैंड्स और उसके बीच में खड़ा होगा घर में आया नया नया मेहमान।

इस खेल के नियम बिल्कुल आसान हैं, मेहमान अगर निर्दोष हुआ तो खुशी खुशी घर से जा सकता हैं लेकिन अगर अपराधी साबित हो गया तो फाँसी का फंदा तैयार किया जाएगा वो भी एक हक़ीक़त वाला।

ये छोटा सा intro पढ़कर आपको लग गया होगा की Chehre को मास्टरपीस बनने से कोई नहीं रोक सकता और साथ में जब किसी फ़िल्म के पोस्टर में बड़े बड़े एक्टर्स मौजूद होते हैं तो फिर फ़िल्म के फ़ेल होने के चांसेज वैसे ही काफ़ी कम हो जाते हैं।

साथ में ये जो आँखों को सुकून देने वाला पूरा माहौल तैयार हैं, चारों तरफ़ बर्फ के बीच में अजीब सा डरावना घर, जिसके बीच में एक कोर्ट रूम वाला प्लेटफॉर्म हैं और हवा में उड़ती हुई रोबोट तितलियाँ ये पढ़कर आपकी भी Chehre फ़िल्म से उम्मीदें बढ़ गयी होंगी।

मुझे भी ठीक ऐसा ही महसूस हुआ था इस फ़िल्म के लिए और उम्मीदें आसमान छू रहीं थी।

लेकिन, एक चीज़ हम सब भूल गए।

कहानी से भी ज्यादा जरूरी होता हैं कहानी बताने का तरीका, बोले तो फ़िल्म का डायरेक्शन जो हमनें शेरशाह, सरदार उद्दम जैसी फिल्मों में देखने को मिला था।

जिसकी बदौलत ये फ़िल्में audience के दिल और दिमाग दोनों पर छा गयी।

लेकिन इस डिपार्टमेंट में Chehre बिल्कुल फ़ीकी रह गयी।

फ़िल्म का स्क्रीनप्ले इतना प्रेडिक्टेबल बना दिया गया कि आने वाले अगले scene का अंत कैसे और कब होगा? हम पहले ही इसका अनुमान लगा लेंगे।

अब देखों दोस्त, इससे ज्यादा चालाकी तो हमें CID के एपिसोड्स में दिख जाएगी।

पहली चीज़ तो ये की एक कमरे में बैठकर दो घण्टे कहानी को चलाना, उसके लिए दमदार राईटिंग चाहिए, हाँ Chehre के डॉयलोग्स लम्बे लम्बे जरूर हैं पर उनमें ना तो कुछ दिलचस्प हैं और ना ही अचंभित।

लेकिन अच्छी चीज़ ये की फ़िल्म की casting बेहतरीन हैं जिसकी वजह से फ़िल्म बर्बाद होने से बच गयी।

लेकिन casting और परफॉर्मेंस बेहतरीन होने से ही कुछ नहीं होता क्योंकि फ़िल्म का क्लाइमेक्स इन सब पर पानी फेर देता हैं।

नहीं, गलत मत समझो मजा आएगा लेकिन अंत से पहले ही समझ जाओगे की अंत कैसे होने वाला हैं और फिर उसमें जबरदस्ती घुसाया गया अमिताभ बच्चन की Pink मूवी से real life क्राइम को दिखाने वाला मोनोलॉग।

ये पब्लिक हैं, ये सब जानती हैं जो real life के केस हैं जैसे फ़िल्म में निर्भया का जिक्र करके फ़िल्म मेकर्स चाहते हैं कि हम इसकी सारी कमियों को नजरअंदाज कर दे।

लेकिन जनाब ये सम्भव नहीं हैं, हमारा दिल हैं निर्भया के साथ जबकि आपकी ड्यूटी हैं हमारे दिमाग को मजेदार कॉन्टेन्ट देना और आप उसी पर ध्यान दीजिए।

लेकिन दोस्त, Chehre फ़िल्म के कॉन्सेप्ट से आपको इश्क होने वाला हैं इस बात की गारंटी मेरी हैं।

आपने मकड़ी का जाल देखा होगा, उसके बीच में शिकार होता हैं और यहाँ फ़िल्म में उस शिकार के आस पास चारों तरफ कई सारी मकड़ी हैं।

आप सोच सोच कर थक जाओगे की इतनी सारी possibilities हैं लेकिन अफसोस, डायरेक्टर ने एकदम सीधा हाईवे वाला रास्ता चुना।

वो पहाड़ की तरह गोल गोल होता तो दिमाग की गाड़ी को चलाने में मजा आ जाता बॉस।

Chehre Review: एक्टिंग और परफॉर्मेंस

अमिताभ बच्चन इस कैरेक्टर में अंदर तक घुस चुके हैं, इनको बोलने की जरूरत ही नहीं हैं। सिर्फ आँख उठाकर देखते हैं तो बस समझ जाओ की सामने वाला तो गया।

इमरान हाशमी की एक्टिंग Chehre में भी हमेशा की तरह effortless हैं डर, गुस्सा, panic सब कुछ इनके एक ही चेहरे पर आसानी से दिख जाएगा।

शुरुआत से अंत तक फ़िल्म से audience को जोड़कर रखना वो काम इनका हैं।

लेकिन अन्नू कपुर की बात ही कुछ ओर हैं। इनकी एक साधारण सी हँसी में भी कई सारे सीक्रेट्स छुपे हुए हैं।

ये एक पोकर फेस हैं मतलब पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों तरफ़ पूरे जोश से प्ले करेंगे हीरो या विलेन, बिल्कुल नहीं समझ पाओगे, इसके लिए अपना दिमाग लगाना पड़ेगा।

हाँ, रिया चक्रवर्ती का फ़िल्म में कोई काम नहीं था उसे फ़िल्म में जबरदस्ती क्यों डाला गया, ये मेरे समझ से परे हैं लेकिन एक चीज़ पक्की हो गयी हैं की एक्टिंग का ए समझने के लिए भी बहुत सारे ट्यूशन की जरूरत हैं इन मैडम को।

Chehre Review: रेटिंग

तो यार मेरी तरफ़ से Chehre फ़िल्म को 5 में से 3 स्टार्स।

एक स्टार तो पहले हाफ़ के दिलचस्प scenes के लिए जिसने कहानी को थोड़ा दिलचस्प बना दिया। वो चारों तरफ़ बर्फ़ और उसके बीच में फँसा मेहमान, बहुत सारे विचार आते हैं दिमाग में और सच में ये वाला कॉन्सेप्ट दमदार हैं Chehre का।

एक स्टार अमिताभ बच्चन और इमरान हाशमी का जो ख़तरनाक combo हैं और दोनों के बीच में जो मजाक होता हैं वो आपको जबरदस्त थ्रिलर देगा बॉस।

और फिर आपको धोखा देने के लिए बैकग्राउंड में अन्नू कपुर तो हैं ही।

और एक स्टार क्रिएटिव और छुपे हुए मतलब वाले individual scenes के लिए, ज्यादा डिटेल में नहीं बताऊँगा लेकिन पेंटिंग वाले scene पर ध्यान देना दोस्त सच में मजा आ जायेगा।

और साथ में ये जिस्म चले जाएंगे पर जिंदा रहेंगे ये चेहरे, ये लाइन आपको चुम्बक की तरह अपनी ओर खींचेगी।

बात करूँ नेगेटिव्ज की तो एक स्टार कटेगा बहुत ही ज्यादा कमजोर और बिना मेहनत वाले डायरेक्शन के लिए, एक थ्रिलर फिल्म की कहानी जलेबी के जैसी टेढ़ी मेढ़ी होनी चाहिए, सीधा सिंपल देखना होता तो कोई TV शो ही देख लेते।

आधा स्टार कटेगा जबरदस्ती इंसाफ के नाम पर फ़िल्म की कमजोरी छुपाने वाले स्टंट के लिए, बहुत गलत बात हैं बॉस।

फ़िक्शनल कहानी को हकीकत से जोड़ना वो भी इस उम्मीद से की लोग sympathy तो दे ही देंगे इसकी फ़िल्म को बिल्कुल जरूरत नहीं थी।

और आधा स्टार कटेगा फालतू में घुसाए गए कैरेक्टर्स के लिए जिनके बिना भी ये कहानी मंज़िल तक पहुँच जाती वो भी बिना कुछ extra किये।

अब देखो दोस्त, चॉइस आपकी हैं बॉलीवुड में कुछ नया देखना हैं तो Chehre को एक बार try जरूर करो लेकिन हाँ, इससे ज्यादा उम्मीद मत लगाना फिर पता चला कि दिल टूट गया।

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