कर्णन रिव्यू । Karnan Movie Review in Hindi

कभी किसी फिल्म को देखकर ऐसा लगा हैं जैसे screen पर जो दिखाया जा रहा हैं वो कोई शूटिंग नहीं बल्कि live सीसीटीवी कैमरे का फ़ुटेज चल रहा हो जिसमें लोग हकीकत में जिंदगी जी रहें हैं?

अगर नहीं तो आ जाओ फिर क्योंकि आज में बात करने वाला हूँ Karnan की जो एक साउथ इंडियन मूवी हैं।

अक्सर मेरे रिव्यू में काफी बड़े बड़े और मज़ेदार डॉयलोग्स पढ़ें होंगे आपने लेकिन पहली बार मुझे ऐसा अहसास हो रहा हैं की आज जिस फ़िल्म की में बात करने वाला हूँ, उसके बारे में लिखा गया हर एक शब्द का लेवल बहुत ऊपर हैं।

तो हमेशा की तरह बिना वक़्त गंवाए सीधा चलते हैं Karnan movie review पर।

Karnan Movie Review in Hindi

Karnan Cast (स्टार कास्ट)

फ़िल्म Karnan के लीड कैरेक्टर का नाम हैं Karnan जिसको सुपरस्टार धनुष ने प्ले किया हैं।

द्रौपथाई के किरदार में हैं राजिशा विजयान जबकि लाल ने येमा राजा का किरदार निभाया हैं। राजिशा विजयान की ये तमिल डेब्यू फ़िल्म हैं।

द्रौपथाई के भाई वडामलैयां का किरदार निभा रहें हैं योगी बाबू वहीं एसपी कन्नाबिरनी के रूप में नटराजन सुब्रमण्यम हमें screen पर दिखाई देंगे।

इसके अलावा पोईलाल के किरदार में गोरी किशन, पद्मिनी के किरदार में लक्ष्मी प्रिया चन्द्रमौली और दुर्योधनन के किरदार में जी.एम. कुमार screen पर होंगे। फ़िल्म में दुर्योधनन पोडियानकुलम गांव के प्रधान हैं।

Karnan Story (कहानी)

Karnan फ़िल्म एक छोटे से गाँव की कहानी हैं जिसमें लोग दिल से काफ़ी बड़े हैं लेकिन दुनियाँ में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए काफ़ी मशक्कत कर रहें हैं।

विलेन बहुत सारे हैं जात-पात, अमीरी-गरीबी, समाज के standards वगैरह वगैरह। संक्षेप में कहूँ तो वो सारे नियम कायदे जिन्होंने लोगों को छोटी छोटी कैटेगरी में बाँट दिया हैं।

इन सब की छुट्टी करने के लिए गाँव का हीरो बनके आतें हैं Karnan जो पिछली कई पीढ़ियों से चले आ रहें बेइज्जती और घटियापन्ती के अंधेरे को हमेशा हमेशा के लिए उजाले में बदलकर अपने गांव को एक नई पहचान दिलाना चाहतें हैं।

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बस ये हिम्मत और आगे बढ़ने की सोच इस समाज के कुछ शक्तिशाली लोगों की आँखों में काँच बनकर चुभ जाती हैं।

इसके साथ ही, फ़िल्म में Karnan और उसके गांव दोनों को सबक सिखाने की प्लानिंग शुरू हो जाती हैं।

अब होगी आर पार की लड़ाई, एक तरफ Karnan और उसकी तलवार तो दूसरी तरफ पुलिस, पॉवर और समाज, तीनों का ख़तरनाक जोड़।

Karnan फ़िल्म के क्लाइमेक्स के बारे में ज्यादा कुछ तो नहीं बताऊँगा लेकिन एक ऐसा शानदार फेसऑफ़ देखने को मिलेगा जिसमें रौंगटे खड़े होने की full गारन्टी हैं।

हजारों सालों से चले आ रहें इस जात पात का सिस्टम या फिर आगे बढ़ने की भूख, दोनों में से जीत किसकी होगी?

अंतिम लड़ाई में कौन किस पर भारी पड़ेगा? जवाब चाहिए तो अमेज़ॉन प्राइम पर मौजूद Karnan फ़िल्म को देख डालिए।

अब करते हैं मुद्दे की बात, Karnan फ़िल्म हैं कैसी? जवाब सिर्फ एक शब्द का हैं – मास्टरपीस

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टीज़र देखकर या फिर पोस्टर पर नजर डालकर आप अंदाजा भी नहीं लगा सकतें की वास्तव में फ़िल्म में हैं क्या?

एक चीज़ होती हैं फ़िल्म के थीम का वर्णन करना जो सिनेमैटिक भाषा में सिर्फ एक्शन थ्रिलर हैं।

लेकिन जब अमेज़ॉन प्राइम पर इस फ़िल्म को अनुभव करोगे तो एक्शन के साथ हॉरर, रोमांस, सस्पेंस सब कुछ महसूस होगा।

ऐसी फिल्में बहुत ही कम बनती हैं जिनका main हीरो कोई एक्टर या फिर डायरेक्टर नहीं बल्कि उसकी स्टोरी लाइन होती हैं।

Karnan की कहानी भी इतनी creativity और emotions के साथ लिखी गयी हैं की ढाई घण्टे सिनेमा और हकीकत के बीच का फ़र्क ही गायब हो जाता हैं।

और सिनेमेटोग्राफी की तो बात ही मत पूछो, फ़िल्म ने हॉलीवुड के लेवल को छू लिया हैं बॉस। हर वो scene जिसमें इस मास की उपस्थिति होती हैं फ़िल्म देखने वाला अंदर तक हिल जाता हैं।

Karnan फ़िल्म के डायरेक्टर सिल्वा राज, इन जनाब के दिमाग में creativity का पूरा खज़ाना छिपा हुआ हैं। ऐसी ट्रिक्स का इस्तेमाल किया हैं जो मैंने आज दिन तक किसी भी फ़िल्म में नहीं देखी।

इंसान तो छोड़ो जब कोई जानवर भी screen पर नजर आता हैं तो उसके द्वारा कहानी में छिपे हुए references छोड़े जाते हैं, दिमाग का सही इस्तेमाल कोई सिल्वा राज से सीखे।

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फ़िल्म के कुछ scenes तो इतने डरावने और प्रभावशाली हैं की फ़िल्म ख़त्म होने के बाद भी आपके जेहन में चुम्बक की तरह चिपक कर आपके साथ रहेंगे।

आँख बंद करो तो Karnan नज़र आते हैं, हर वो scene जिसमें गांव की जिंदगी को दिखाया गया हैं वो शत प्रतिशत प्राकृतिक हैं एकदम वास्तविक।

देखो बॉस, Karnan एक स्पेशल फ़िल्म हैं जिसके दर्शन भारत में होना बड़ी किस्मत की बात हैं। अगर आप वास्तविक मतलब वाली सिनेमा देखना पसंद करते हो तो बॉस आपके लिए Karnan एक तोहफ़े से कम नहीं हैं।

एक्टिंग और परफॉर्मेंस

और अब बात उनकी जो पूरी फ़िल्म को ढाई घण्टे काबू में करके audience के दिल और दिमाग दोनों को shock कर देते हैं – धनुष the versatile machine, इनके ऊपर ये नाम एकदम परफेक्ट बैठता हैं।

असुरन देखी होगी आपने? धनुष अपनी फैमिली के लिए blood bath पर उतर आए थे और यहाँ तो उनके कंधों पर पूरे गांव का जिम्मा हैं। अब आप सोच लो कि फ़िल्म में मार धाड़ का लेवल कहाँ तक जा सकता हैं?

Karnan फ़िल्म में धनुष को देखकर ऐसा लगेगा की वो एक्टिंग करते ही नहीं हैं बल्कि वो वास्तविक जिंदगी में उस किरदार को जी रहें हैं।

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डॉयलोग्स में दर्द हो या फिर आँखों में ज्वालामुखी के लावा जितना गर्म गुस्सा और सिर्फ मारधाड़ ही नहीं रोमांटिक moments भी, हर फील्ड में धनुष expert साबित होते हैं।

सिनेमा का सबसे बड़ा अवॉर्ड होता हैं ऑस्कर लेकिन धनुष की परफॉर्मेंस के लेवल को मापने के लिए वो भी छोटा साबित होगा।

अभी नेशनल अवॉर्ड मिला था, समझ लो अगले की तैयारी शुरू हो गयी हैं।

लीड कैरेक्टर्स को तो छोड़ दो, साइड कैरेक्टर्स में जो जूनियर आर्टिस्ट cast किए गए हैं उनके टैलेंट का भी जवाब नहीं।

रेटिंग

मेरी तरफ़ से Karnan फ़िल्म को 5 में से 5 स्टार्स मिलेंगे भईया।

एक स्टार मास को एक चिन्ह के तौर पर उपयोग करके प्रस्तुत करने के लिए।

एक स्टार चालाकी से फ़िल्म में डाले गए जानवरों के references के लिए, ये वास्तव में creative आईडिया था।

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एक स्टार धनुष और फ़िल्म में जुड़े एक एक आर्टिस्ट की वास्तविक और धांसू परफॉर्मेंस के लिए।

एक स्टार सिल्वा राज के दिमाग ने जो कहानी लिखी हैं उसकी सराहना करने के लिए।

अंतिम एक स्टार अच्छे और बुरे की लड़ाई में गलत को सही बनाकर justify ना करते हुए समाज में प्रभाव डालने की कोशिश करने वाले subject के लिए।

तो बस Karnan review में इतना ही था, में मिलता हूँ आपसे किसी ओर रिव्यू में तब तक के लिए – जय हिंद।

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