Love Hostel Movie Review in Hindi

फाइनली Zee5 ओरिजनल Love Hostel रिलीज़ हो गयी हैं और इस ब्लॉग में हम इसी के बारे में बात करेंगे।

देखों बॉस क्रिकेट का खेल इसलिए इतना दिलचस्प हैं क्योंकि उसमें एक नहीं बल्कि दो पारियाँ होती हैं।

पहली टीम ने जैसा खेला, दूसरी वाली उससे अच्छा खेल पाएगी या नहीं बस उसी का इंतज़ार मैच को इतना दिलचस्प बना देता हैं।

ठीक उसी तरह बॉलीवुड में भी आजकल दूसरी पारियाँ खेलनी शुरू हो गयी हैं।

अभिषेक बच्चन को ही देख लो।

पहली पारी में ऑडिएंस ने नजरअंदाज कर दिया तो Bob Biswas के रूप में दूसरी पारी खेलने उतर गए जिसमें आते ही सीधा छक्का मार दिया।

अब उन्ही की तरह एक ओर कलाकार सिनेमा के इस मैच में अपनी दूसरी पारी की शुरुआत करने जा रहें हैं, बॉबी देओल।

वैसे तो MX Player की मोस्ट पॉपुलर वेब सीरीज़ आश्रम में पहले ही ऑडिएंस को अपनी ओर लुभा चुके हैं।

लेकिन इस बार बॉबी देओल का एक नया अवतार आया हैं।

Love Hostel जो हाल ही Zee5 पर रिलीज़ हुई हैं।

डेढ़ घण्टे की इस फ़िल्म से बॉबी देओल अपनी दूसरी पारी की शुरुआत करने जा रहें हैं।

कैसी हैं Love Hostel? और क्या आपको अपने डेढ़ घण्टे इसे देने चाहिए?

बस इस ब्लॉग में इसी बात पर चर्चा करेंगे।

Love Hostel Review in Hindi

Love Hostel Cast (स्टार कास्ट)

  • बॉबी देओल – विराज सिंह डागर
  • विक्रांत मस्सी – अहमद शौकीन उर्फ़ आशु
  • सान्या मल्होत्रा – ज्योति दिलावर
  • राज अर्जुन – डीसीपी सुशील राठी
  • सिमरन रावल – बबली दिलावर
  • अदिति वासुदेव – निधि दहिया
  • योगेश तिवारी – रणधीर दिलावर (ज्योति के पिताजी)
  • कुमकुम जैन – सविता दिलावर (ज्योति की माँ)
  • सोनल झा – सुजाता राठी (डीसीपी सुशील राठी की पत्नी)
  • स्वरूप घोष – एमएलए कमला दिलावर
  • अक्षय ओबेरॉय – दिलेर

Love Hostel Details (जानकारी)

  • डायरेक्टर – शंकर रमन
  • राईटर्स – शंकर रमन, महक जमाल, योगी सिंघा
  • स्क्रीनप्ले – शंकर रमन
  • प्रोड्यूसर – गौरी खान, मनीष मुंद्रा, गौरव वर्मा
  • सिनेमेटोग्राफी – विवेक शाह
  • म्यूजिक – क्लिंटन सेरेजो, जीत गांगुली, बियांका गोम्स
  • ओटीटी प्लेटफॉर्म – Zee5
  • रिलीज़ डेट – 25 फ़रवरी 2022
  • रनिंग टाइम – 100 मिनट

Love Hostel Story (कहानी)

फ़िल्म Love Hostel की कहानी एक भूत के इर्दगिर्द घूमती हैं जो कई सालों पहले पुलिस की नजर और सरकारी कागजों के रिकार्ड्स में मर चुका हैं।

इस भूत का नाम हैं विराज सिंह डागर जिन्हें आप डागर साहब भी कह सकतें हो।

अब यहाँ चोंकाने वाली बात ये हैं कि इनकी आत्मा आज भी इंसानों की जान ले रहीं हैं, वो भी बंदूक की गोली से या फिर फाँसी के फंदे पर लटकाकर।

इन मरने वाले लोगों में सिर्फ एक बात कॉमन हैं की इनमें से हर किसी ने अपने घर वालों के ख़िलाफ़ जाकर दूसरे धर्म में या फिर ऊंच नीच जात पात को एकदम नजरअंदाज करके शादी कर ली थी।

अब नया और लेटेस्ट क़िस्सा हैं ज्योति और आशु का जो कोर्ट मैरिज करने के बाद एक Love Hostel में छुपकर बैठे हैं।

vikrant and sanya

बस वहीं इनका ताजमहल हैं जहाँ से इनकी नई जिंदगी की शुरुआत होने वाली हैं।

लेकिन इनके घरवालों ने इन दोनों के पीछे डागर साहब के भूत को खुला छोड़ दिया जिनका मिशन एकदम सिंपल हैं – दूल्हा दुल्हन दोनों वापस चाहिए, जिंदा या मुर्दा उससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

अब आते हैं सीधा पॉइंट पर, फ़िल्म Love Hostel कैसी हैं?

एक शब्द में कहूँ तो मजेदार, बाहर से देखकर इसको मामूली रोमांटिक ड्रामा समझने की गलती मत करिएगा क्योंकि अंदर से ये एक ख़तरनाक सस्पेंस थ्रिलर हैं।

सीधा पहले scene से ही कहानी अपने मैन कैरेक्टर को आपके सामने स्क्रीन पर रख देती हैं, बिल्कुल भी वक्त बर्बाद नहीं किया जाता।

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और फ़िल्म Love Hostel की सबसे मजेदार बात ये की मैन कैरेक्टर कोई हीरो नहीं बल्कि विलेन हैं।

नेगेटिव शेड वाले बन्दे के इर्दगिर्द कहानी चलाना ही इस फ़िल्म को बाकी बॉलीवुड फ़िल्मों से अलग खड़ा कर देता हैं।

फ़िल्म के पूरे डेढ़ घण्टे कब निकलेंगे? आपको पता भी नहीं चलेगा क्योंकि फ़िल्म हॉलीवुड स्टाइल में एकदम फटाफट रेलगाड़ी की तरह तेज भागती हैं।

बस जितने की जरूरत हैं उतना ही दिखाया जाता हैं, कहानी को जबरदस्ती लम्बा नहीं खिंचा गया हैं।

और हाँ, एक बात ओर, फ़िल्म Love Hostel का क्लाइमेक्स ऐसा हैं जिसका अनुमान आप बिल्कुल भी नहीं लगा सकतें।

इसमें जिंदगी और मौत के बीच जो जंग चल रहीं हैं उसमें से अंत में कौन जीतेगा? इस सवाल का जवाब ढूँढने के लिए आपको Love Hostel का क्लाइमेक्स देखना ही पड़ेगा।

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स्पेशली अगर बॉबी देओल के कैरेक्टर की बात करें तो वो पूरी फिल्म में मुश्किल से दो तीन डायलॉग बोलता हैं लेकिन राईटर्स ने इस कैरेक्टर को इतना ख़तरनाक लिखा हैं कि स्क्रीन पर इनकी उपस्थिति ही काफ़ी हैं फ़िल्म Love Hostel को दिलचस्प बनाने के लिए।

हालांकि फिल्म में कुछ फालतू के ऐंगल्स जरूर घुसाए गए हैं जहाँ जबरदस्ती हिन्दू मुसलमान वाले टॉपिक को हाईलाइट किया गया हैं ताकि कहानी को थोड़ा controversial बनाया जा सकें।

लेकिन इसके बिना भी मैन कहानी को दिलचस्प बनाया जा सकता था।

Love Hostel Review: एक्टिंग

बॉबी देओल ने इस फ़िल्म में वाकई कमाल की परफॉर्मेंस दी हैं। फ़िल्म में इनके हावभाव इतने डरावने हैं कि ये अगर हँस भी दे तो कमजोर दिल वाला इंसान तो रोने ही लग जायेगा।

bobby deol in love hostel movie

पूरी Love Hostel की कहानी को अपने इशारों पर नचाते हैं ये, डागर साहब का वाकई फ़िल्म में काफ़ी पॉवरफुल कैरेक्टर हैं जिसे बॉबी देओल ने अपनी कमाल की परफॉर्मेंस से जिंदा कर दिया हैं।

इसके अलावा, विक्रांत और सान्या दोनों कमाल के कलाकार हैं जो हर फिल्म की कहानी के हिसाब से खुद को बदल देते हैं।

इस फ़िल्म में भी हर एक scene के अंदर आपको बाबू शोना वाले प्यार में डूबे दो आशिक नज़र आएंगे।

जिन पर कभी गुस्सा भी आएगा तो कभी बेचारों पर दया भी आएगी, आप इनके साथ एक कनेक्शन महसूस कर सकतें हो।

Love Hostel Review: क्या अच्छा क्या बुरा?

फ़िल्म Love Hostel का स्क्रीनप्ले काफ़ी तेज हैं जो आपको एक पल के लिए भी बोर नहीं होने देगा।

इस फ़िल्म की एक अच्छी बात ये हैं कि बाकी बॉलीवुड फिल्मों की तरह Love Hostel की कहानी को एक फ़िल्मी अंदाज में खत्म ना करते हुए real लाइफ में जो होता हैं या हो सकता हैं, उस मैसेज के द्वारा इसके क्लाइमेक्स को बनाया गया हैं।

आप फ़िल्म के अंत का बिल्कुल भी अनुमान नहीं लगा पाओगे दोस्त।

साथ ही, बॉबी देओल का जबरदस्त कमबैक और विक्रांत – सान्या की नोकझोक वाली केमिस्ट्री बड़ी कमाल की हैं, आपको हर पल एंटरटेन करती रहती हैं।

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लीड कैरेक्टर्स हो या सपोर्टिंग कैरेक्टर्स, परफॉर्मेंस के मामले में सब बड़े कमाल के हैं।

फ़िल्म Love Hostel में जिस तरह एक नेगेटिव कैरेक्टर को इतने प्रभावशाली रूप से लिखा गया वो बड़ा ही कमाल का हैं।

जिससे आप शायद कुछ वक्त के बाद फ़िल्म के नाम को भूल जाओ लेकिन डागर कौन था? क्या था?

ये आपके जेहन में हमेशा के लिए रह जायेगा।

हालांकि इन सब अच्छी बातों के अलावा फिल्म Love Hostel में कुछ कमियाँ भी हैं जो थोड़ा मजा खराब कर देती हैं।

जैसे, फ़िल्म में कुछ डॉयलोग्स को जबरदस्ती घुसाया गया हैं जो एक थ्रिलर कहानी को पोलिटिकल रिलीजन एंगल में घुसा देते हैं।

साथ ही, फ़िल्म के कुछ साइड कैरेक्टर्स को थोड़ा सा नजरअंदाज किया गया हैं और मैन कहानी से दूर रखा गया हैं।

इनका कैरेक्टर्स पॉवरफुल तो हैं लेकिन इन्हें पर्याप्त scenes नहीं दिए गए हैं।

हाँ तो गुरु, ओटीटी पर बॉबी भईया की Love Hostel देखना पसंद करोगे या फिर हाल ही रिलीज़ हुई Rudra जिसके द्वारा अजय देवगन ने ओटीटी पर डैब्यू किया हैं?

वैसे अभी तक आपने मेरा Rudra review पढ़ा या नहीं?

खैर, Love Hostel को लेकर आपके क्या विचार हैं? कॉमेंट्स में लिख दो फटाफट।

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