सनक रिव्यू । Sanak Movie Review in Hindi

एक चीज़ नोटिस की आपने, हॉलीवुड में डेढ़ घण्टे की फिल्में बनती हैं और अपने बॉलीवुड में ढाई घण्टे की।

अंतर सिर्फ वक्त का हैं। वहाँ सीधा point पर आते हैं और यहाँ बीच में गाने बजाने के बिना फ़िल्म बनाना लगभग नामुमकिन सा हैं।

लेकिन finally एक बदलाव की शुरुआत हो गयी हैं एक ऐसा सिनेमा जो हॉलीवुड स्टाइल को फॉलो करता हुआ इंडियन audience के सामने सीधा कॉन्टेन्ट लाके रख देता हैं, वो भी बिना वक्त बर्बाद किये।

सनक, विद्युत जामवाल की नई फ़िल्म जहाँ आपको मिलेगा एक्शन और सिर्फ एक्शन। तो हमेशा की तरह बिना वक्त बर्बाद किए चलते हैं Sanak Review पर।

Sanak Movie Review in Hindi

Sanak Cast (स्टार कास्ट)

सनक फ़िल्म के लीड कैरेक्टर हैं विवान आहूजा जिसका कैरेक्टर प्ले कर रहें हैं विद्युत जामवाल। ये एक मार्शल आर्ट्स ट्रेनर रह चुके हैं।

दूसरा किरदार हैं अंशिका मैत्रा का जिसे निभाया हैं रुकमणी मैत्रा ने, ये विवान की बीवी हैं।

नेहा धूपिया फ़िल्म में एसीपी जयती भार्गव का किरदार निभा रहीं हैं जबकि फ़िल्म के main विलेन हैं कैप्टन साजु सोलंकी, जिनका किरदार निभाया हैं चंदन रॉय ने।

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फ़िल्म में एक ओर चंदन रॉय हैं जिनके किरदार का नाम हैं रियाज़ अहमद मोतेलकर जो एक अस्पताल में काम करते हैं। ये वहीं अस्पताल हैं जहाँ ये सब कांड होता हैं।

गुंडों का अस्पताल को कब्जे में लेने का कारण हैं अजय पाल सिंह, जिनका किरदार निभाया हैं किरण करमाकर ने।

Sanak Story (कहानी)

अपना हीरो एकदम परफेक्ट जिंदगी जी रहा हैं अपने खूबसूरत से प्यार के साथ, लेकिन फिर एक दिन हीरो की हिरोइन हो जाती हैं बीमार।

वो भी ऐसी की उसमें पैसा इतना लगाना पड़ेगा कि बैंक बैलेंस भी कम पड़ जायेगा, लेकिन वो कहते हैं ना, जान हैं तो जहान हैं।

तो हमारा हीरो भी जैसे तैसे जुगाड़ करके पैसों की व्यवस्था करता हैं और अपनी हीरोइन का ऑपरेशन करवा लेता हैं।

अब यहाँ से अपने हीरो की लव स्टोरी फिर से शुरू हो जाती अगर कहानी में विलेन की entry ना हुई होती तो।

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हाथ में एक बड़ी सी बंदूक और साथ में 15-20 कराटे मार्शल आर्ट्स में एक्सपर्ट विदेशी गुंडे, पूरे के पूरे हॉस्पिटल को अपने कब्जे में ले लेते हैं, डॉक्टर्स, मरीज़ और उनके चाहने वाले सब के सब फँस गए हैं बेचारे।

लेकिन अपने हीरो की तो बात ही अलग हैं। इनमें छुपा हैं एक छोटा सुपरहीरो, प्यार तो हैं ही लेकिन साथ में एक्शन का भंडार लेकर घूमते हैं ये जनाब।

उधर 15-20 विदेशी गुंडे तो इधर अपना अकेला हीरो और उसकी सनक। अब होगी दे दना दन प्रतियोगिता वो भी हॉलीवुड की स्टाइल में।

एक एक करके इन दुश्मनों को निपटाना भी हैं और ये गंदे लोग इस अस्पताल में आये क्यों? ये भी पता लगाना हैं।

इसी बीच माहौल ऐसा हो जाता हैं कि सिर्फ एक गलती और अपने हीरो हीरोइन की लव स्टोरी हमेशा हमेशा के लिए ख़त्म।

अब अंत में कौन जीता कौन हारा? इसका जवाब मिलेगा आपको डिज़्नी प्लस हॉटस्टार पर, घर बैठे।

देखो दोस्त, झूठ नहीं बोलूंगा, सनक फ़िल्म में स्टोरी के नाम पर नया कुछ भी नहीं मिलेगा ना स्पेशल ना ही यूनीक कुछ अलग हटके।

लेकिन कहानी कैसे आगे बढ़ती हैं? फ़िल्म का हर एक scene काफ़ी दिलचस्प हैं। फ़िल्म का कॉन्सेप्ट survival हैं, किसी एक को जिंदा रहना हैं तो दूसरे का मरना जरूरी हैं।

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अब चैलेंज ये हैं की एक्शन उस लेवल का होना चाहिए को audience ये मानने को मजबूर हो जाए कि लड़ाई जिंदगी और मौत की हैं, कोई टाईमपास नहीं चल रहा।

तो बस दिमाग लगते हुए फ़िल्म के center में विद्युत जामवाल ड्राइविंग सीट पर हैं और फ़िल्म को अपने हिसाब से चला रहें है।

एक्शन इनका एक्स फ़ेक्टर हैं और डायरेक्टर ने इनके टैलेंट का एकदम सही फायदा उठाया हैं। best चीज़ ये हैं कि फ़िल्म के एक्शन सीक्वेंसेज काफ़ी लॉजिक के साथ डिज़ाइन किए गए हैं।

एक्शन होता हैं हाथ पैर वाला बिल्कुल natural तरीके से।

वो एनिमेशन डालकर लोगों को हवा में उड़ाना और एक वक़्त में एक बन्दे का सौ लोगों से लड़ जाना जैसी बिना लॉजिक की चीजें सनक में देखने को नहीं मिलेगी।

जॉन विक का नाम तो सुना ही होगा आपने।

वो बन्दा जिसनें अपने कुत्ते के लिए लोगों की जान लेना शुरू कर दिया था, बस सनक वाला हीरो उसकी हूबहू फोटोकॉपी हैं, सामने कौन हैं कितने हैं? बिल्कुल फ़र्क नहीं पड़ता।

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सनक फ़िल्म में सबसे बड़ा advantage ये हैं कि सेट के नाम पर पूरा का पूरा हॉस्पिटल मिल गया एक्शन दिखाने के लिए, इतने सारे कमरे ही कमरें हैं की किस कमरें से कौन बाहर निकल आए? आपको बिल्कुल पता नहीं चलेगा।

Surprise फ़ेक्टर और थ्रिल लेवल बढ़ाना एकदम आसान हो जाता हैं इस अस्पताल की वजह से।

अभी देखों, आसान और सरल भाषा में बताऊँ तो सनक में ऐसा कुछ नहीं हैं जिससे दिमाग घूम जाए या फिर आप फ़िल्म के क्लाइमेक्स के बारे में कई दिनों तक सोचते रहो।

सनक फ़िल्म की राइटिंग बहुत ही basic हैं, एकदम आसान, बिना किसी ट्विस्ट्स एंड टर्न्स के।

लेकिन एक्शन के दीवानों, आपकी आँखों को जन्नत नसीब होगी और इस बात की गारंटी देने के लिए एक नाम ही काफ़ी हैं – विद्युत जामवाल

एक्टिंग और परफॉर्मेंस

चंदन रॉय का नेगेटिव कैरेक्टर सच में जबरदस्त हैं। एक तो इनकी आवाज ही गुंडों वाली हैं, जो भी मुँह से निकलता हैं वो बुरा ही होगा, ऐसा हम पहले से ही सोच लेते हैं क्योंकि इनकी पर्सनेलिटी बनाई ही ऐसी गयी हैं।

पहले तो बॉबी देओल की आश्रम वेब सीरीज़ में बाबा के साथ जिंदगी के मजे लेना और अब सनक में हीरो हीरोइन की लव स्टोरी पे full stop लगाना।

एक्टिंग variation हो तो ऐसी वरना हीरो तो कोई भी बन जाता हैं बस नाम के पीछे बड़ा सा सरनेम होना चाहिए।

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हाँ लेकिन सनक फ़िल्म में सब कुछ सीरियस ही हैं ऐसा बिल्कुल नहीं हैं, यहाँ एक दूसरे चंदन रॉय भी हैं फ़िल्म में जो एक्शन के बीच में humor घुसाने का काम करते हैं।

हँसेंगे नहीं लेकिन हंसाएंगे जरूर अपनी बातों से।

एक वेब सीरीज़ आई थी कुछ वक्त पहले – पंचायत, उसमें इनका जो कैरेक्टर था उसी को उठाके सीधा सनक में डाल दिया हैं डायरेक्टर साहब ने और ये experiment सफ़ल भी हो जाता हैं इनका।

रेटिंग

तो यार मेरी तरफ़ से सनक को 5 में से 3.5 स्टार्स।

एक स्टार बिल्कुल ख़तरनाक स्टाइल में डिज़ाइन किये गए एक्शन सीक्वेंसेज के लिए जो natural और believable हैं, यहाँ VFX वाली कलाकारी नहीं हैं।

एक स्टार एक्शन मशीन के तौर पर विद्युत जामवाल की ख़तरनाक परफॉर्मेंस के लिए। ये जो कैरेक्टर प्ले कर देते हैं उसमें इनके अलावा कोई दूसरा एक्टर फिट होने की हिम्मत भी नहीं कर सकता।

एक स्टार फ़िल्म का फ्लो शुरुआत से लेकर अंत तक बिना किसी रुकावट के बनाएं रखने के लिए वो भी बिना किसी फालतू गाने बजाने के।

वरना एक्शन फ़िल्म और नोरा फतेही का आइटम सॉन्ग, इससे कोई नहीं बच पाया हैं आज तक।

और आधा स्टार सनक फ़िल्म में नेगेटिव कैरेक्टर में कास्ट किये गए चंदन रॉय और यहाँ तक कि उनकी गैंग में शामिल गुंडे, इन सबकी जबरदस्त मार्शल आर्ट्स की मूव्ज के लिए।

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एक्शन दोनों तरफ़ तगड़ा था।

बात करूँ नेगेटिव्ज की तो एक स्टार कटेगा बेहद सीधी साधी भोली भाली बिना किसी surprise के लिखी गयी basic सी कहानी के लिए।

ना कुछ नया ना कुछ स्पेशल।

और आधा स्टार कटेगा फ़िल्म के center में चल रहीं लव स्टोरी पर ज्यादा भरोसा ना करवाने के लिए, लीड कैरेक्टर्स से जो एक कनेक्शन होता हैं वो महसूस नहीं हो पाता।

अब अंत में एक बढ़िया सा ज्ञान मेरी तरफ़ से की अगर एक्शन फ़िल्में पसन्द हैं और भारत में घर बैठे बैठे हॉलीवुड वाली feeling लेनी हैं तो मेरे दोस्त सनक जरूर देख डालो।

लेकिन अगर आप उनमें से हैं जिन्हें कुछ नया चाहिए, कुछ अलग तो फ़िल्म को टाटा गुडबाय कह दो अभी, इसी वक्त।

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