Shershaah Movie Review in Hindi: Release Date, Cast, Story

फ़िल्म कैसी लगी? अक्सर इसके दो जवाब होते हैं अच्छी या फिर बुरी।

लेकिन एक तीसरी कैटेगरी से आप अभी तक मिले नहीं होंगे।

एक ऐसी फिल्म जो इतनी परफेक्ट बनकर बाहर निकले जो आपको तोड़ के रख दे। कोई फिल्टर नहीं, बस उसके लिए आपके दिल में इज्ज़त होगी जो शब्दों में नहीं आँखों से बाहर निकलती हैं।

सिद्धार्थ मल्होत्रा, बॉलीवुड के सबसे underrated एक्टर्स में से एक फाइनली इन्होंने वो काम करके दिखाया जिसनें सिनेमा और हकीकत के बीच के पर्दे को लगभग ख़त्म सा कर दिया हैं।

वर्दी और emotions, इस टॉपिक के साथ पंगा लेना किसी भी फ़िल्म मेकर्स के लिए सबसे बड़ा चैलेंज होता हैं।

लेकिन सिद्धार्थ एकदम personal ले गए हैं इस चैलेंज को मतलब एक वक्त आएगा जब डॉयलोग्स की भी जरूरत नहीं पड़ेगी सिर्फ इनकी आँखे ही फ़िल्म को आगे बढ़ा रही होगी।

Shershaah का एक लाइन में रिव्यू, बॉलीवुड के सबसे बेहतरीन अनुभवों में से एक जिसमें एक तरफ़ इतिहास हैं तो दूसरी तरफ़ सॉलिड सिनेमा कॉन्टेन्ट।

Shershaah Movie Review in Hindi: Release Date, Cast, Story

Shershaah Cast (स्टार कास्ट)

फ़िल्म Shershaah का सबसे अहम कैरेक्टर हैं कैप्टन विक्रम बत्रा उर्फ़ विक्की जिसे निभाया हैं सिद्धार्थ मल्होत्रा ने।

डिम्पल चीमा जो उनकी गर्लफ्रैंड और मंगेतर हैं उनका कैरेक्टर निभाया हैं कियारा आडवाणी ने।

शिव पंडित फ़िल्म में जहाँ लेफ्टिनेंट संजीव जामवाल उर्फ़ जिम्मी के किरदार में दिखाई देंगे वहीं निकीतिन धीर मेजर अजय सिंह जसरोटिया उर्फ़ जस्सी के किरदार में स्क्रीन पर होंगे।

विक्की के जिगरी यार नायब सूबेदार बंसी लाल शर्मा के किरदार को अनिल चरनजीत निभा रहें हैं।

Shershaah Story (कहानी)

23 साल विक्रम बत्रा के तौर पर और 2 साल का सफ़र कैप्टन Shershaah बनने का।

फ़िल्म का फोकस दोनों तरफ़ हैं, शुरुआत मेरी आपकी तरह होती हैं जिंदगी का वो खेल जिसे हर कोई खेलता हैं परिवार, दोस्त, प्यार, सपने और फिर एक बड़ा सवाल, मेरी ज़िंदगी का मकसद क्या हैं?

विक्रम को इस सवाल का जवाब मिलता हैं एक वर्दीधारी आदमी।

फ़िल्म Shershaah का best part ये हैं कि फ़िल्म एकदम बैलेंस के साथ चलती हैं, personal साइड में प्यार हैं रोमांस, म्यूजिक, एहसास। ये एक छोटी सी ट्रिक हैं जो हमें मजबूर कर देती हैं कि हम खुद को विक्रम में ढूँढने की कोशिश करें।

और professional साइड में हैं एक युद्ध जिसके लिए Shershaah तैयारी कर रहें हैं अपने देश का गोल्डन इतिहास।

एक एक कदम लेकर कहानी आगे बढ़ती हैं जिसमें फ़िल्म के टेक्निकल पहलू जैसे VFX, सिनेमेटोग्राफी इन सब का इस्तेमाल करके वर्दी के लिये इज्जत पैदा की जाती हैं।

लेकिन यहाँ बहुत बड़ा ख़तरा भी था की एक छोटी सी गलती होती, ये personal और professional आ जाते आमने सामने और audience को किसी एक को चुनना पड़ता।

मतलब एक अच्छा लगता तो दूसरे को बुरा बनना पड़ता।

लेकिन इधर फ़िल्म के मेकर्स ने एक ताश का इक्का चल दिया।

ख़तरनाक लेवल की राईटिंग कहानी से लेकर चार पाँच वाक्यों वाली गहरी बातचीत या फिर दिल मांगें मोर जैसे one liners, सब कुछ तीरंदाजी के खेल के जैसे सटीक निशाने पर जाके लगा हैं।

अब ऐसा कैसे हुआ?

क्योंकि Shershaah के मेकर्स के पास एक advantage था की उनको विक्रम बत्रा की ज़िंदगी के बारे में पहले से ही पता हैं।

शुरू कैसे होगा ख़त्म कैसे होगा?

तो बस सबसे आकर्षक हिस्सों को उठाकर जो भले ही वास्तविक जिंदगी में आगे होंगे लेकिन उनकी तैयारी कहानी में पहले से ही शुरू कर दी जाती हैं।

जैसे पेप्सी का एड, जिसमें दिल मांगे मोर आपको बैकग्राउंड में चार पांच बार सुनने को मिल जाएगा।

ये हैं फ़िल्म मेकर्स की चालाकी और मौके पे चौका मारना।

क्योंकि झंडा लहराते हुए जब ये स्लोगन बोला जाता हैं तो audience पहले से ही तैयार हैं। अब वो स्लोगन नहीं emotion में बदल चुका हैं, खेल गए डायरेक्टर साहब।

ये फ़िल्म बाकी सबसे अलग और खास हैं, वो कैसे? जवाब हैं सच्चाई।

वास्तविक दुनियाँ से जोड़ने वाली छोटी छोटी डिटेल्स जो अक्सर बॉलीवुड फिल्म मेकिंग स्टाइल में कहीं गायब सी हो जाती हैं सिर्फ चार पॉइंट्स में अपनी बात को साबित करके दिखाऊंगा आपको।

फ़ौजी भी इंसान होते हैं अक्सर सुना होगा आपने, Shershaah ने उस चीज़ को एकदम बीच में रख दिया हैं।

विक्रम बत्रा एक लड़ाकू के तौर पर तो पैदा नहीं हुए थे, हर इंसान की एक यात्रा होती हैं और soldiers आपस में दोस्त भी होते हैं।

हाँ सर नहीं सर करने के अलावा ये लोग आपस में मेरी और आपकी तरह मजाक भी करते हैं।

Shershaah में बिल्कुल वास्तविक बातचीत का इस्तेमाल किया गया हैं जो Shershaah को एक मशीन नहीं बल्कि इंसान बनाकर प्रस्तुत करता हैं।

अब दूसरे पॉइंट पर ज़रा extra ध्यान देना क्योंकि इससे बॉलीवुड को देखने का नजरिया बदल जायेगा आपका।

Bhuj और Bell Bottom, दोनों फिल्मों का सब्जेक्ट भी Shershaah की तरह देशभक्ति ही हैं लेकिन इनमें कुछ नोटिस किया आपने?

इन फिल्मों में सपोर्टिंग cast में बड़े बड़े नाम हैं संजय दत्त, नोरा फतेही, सोनाक्षी सिन्हा, लारा दत्ता, हुमा कुरैशी और भी कई सितारे, ये वो हैं जिनका नाम हम सब जानते हैं।

लेकिन फ़िल्म Shershaah में लीड जोड़ी कियारा आडवाणी और सिद्धार्थ मल्होत्रा को छोड़ दो तो बाकी कैरेक्टर्स में कौनसे कलाकार हैं शायद 90% audience को तो उनका नाम भी नहीं पता होगा।

क्योंकि यहाँ फ़िल्म का फोकस नाम पर नहीं काम पर किया गया हैं।

ऐसी जबरदस्त सपोर्टिंग cast हैं जो मामूली सी फ़िल्म को तगड़ी यादगार फ़िल्म में बदल देती हैं।

ये कोई हीरो हीरोइन नहीं बल्कि real एक्टर्स हैं जो अपने फ़िल्मी कैरेक्टर को असली बनाने की पूरी कोशिश करते हैं और लीड एक्टर्स का काम बहुत आसान हो जाता हैं।

इस चीज़ की उम्मीद करन जौहर से तो बिल्कुल नहीं थी लेकिन सर जी वाकई दिल जीत लिया हैं इस बार, सच्चा टैलेंट कोई फालतू की रिश्तेदारी नहीं।

अब तीसरा पॉइंट जो काफ़ी दिलचस्प हैं और आप सब उससे जरूर जुड़ा हुआ महसूस करोगे।

अक्सर जब किसी फ़ेमस पर्सन पर बॉयोपिक बनती हैं स्पेशल सिपाही पर तो पूरा दो तीन घण्टे one man show चलता हैं, total हीरोपंती।

अपना हीरो अकेले 100 लोगों से टकराएगा, car भी चलाएगा हेलीकॉप्टर भी उड़ाएगा और अंत में देश का झंडा भी लहराएगा, फ़िल्म ख़त्म।

लेकिन यहाँ Shershaah में पूरे मिशन को एक टीम वर्क के तौर पर दिखाया हैं। विक्रम बत्रा युद्ध में लड़ रहें हैं तो साथ में बाकी फ़ौजी भी खड़े हैं वो सब कुछ अकेले नहीं करेंगे।

और फ़िल्म ख़त्म होने के बाद post credit में कारगिल युद्ध से जुड़े हर real life hero को सेलिब्रेट किया जाता हैं ना की सिर्फ एक इंसान को पूरा फोकस में डाल दिया जाए।

जो बॉलीवुड की पुरानी बीमारी हैं।

चौथा पॉइंट हैं गाने जो हमेशा किसी भी देशभक्ति फ़िल्म को बेचने के लिए इस्तेमाल किये जाते हैं देश को बीच में रखकर हर फिल्म में तीन चार गाने तो डालें ही जाते हैं।

लेकिन यहाँ Shershaah में आपको एक भी गाना नहीं मिलेगा, नहीं मेरा मतलब म्यूजिक तो हैं और वो भी जबरदस्त वाला लेकिन सिर्फ प्यार, इश्क, मोहब्बत के लिए।

देशभक्ति साबित करने के लिए इस फ़िल्म को किसी गाने की जरूरत ही नहीं पड़ती उसको महसूस कराने के लिए इसका दमदार कॉन्टेन्ट ही काफ़ी हैं।

और अब फाइनली वो चीज जिसके बारे में लिखने को में काफ़ी देर से बेताब हूँ – एक्टिंग।

एक्टिंग और परफॉर्मेंस

कैप्टन विक्रम बत्रा के रूप में सिद्धार्थ मल्होत्रा ने क्या परफॉर्मेंस दी हैं यार, सच में स्पीचलेस।

पहले scene के साथ ही वर्दी को एक सच्चे सिपाही के तौर पर पहना हैं इस बन्दे ने।

Shershaah में सिद्धार्थ गायब हैं आपकी मुलाकात होगी एक real आर्मी के सिपाही से जो देश के लिए जान दे भी सकता हैं और ले भी सकता हैं।

फिर दूसरी तरफ़ एक लवर बॉय वाला कैरेक्टर दिल की बातें, वो भी आपको साफ़ साफ़ नज़र आएंगी इनकी आँखों में।

लेकिन इसका क्रेडिट कियारा आडवाणी को भी जाएगा, दोनों के बीच की केमिस्ट्री एकदम जबरदस्त हैं आग की तरह गरमागरम।

Emotions वो भी बिल्कुल सच्चे फ़िल्मी डायलॉग बाजी नहीं looks ही काफ़ी हैं दोनों के बीच में।

कियारा के साथ कनेक्ट करने से आप खुद को रोक ही नहीं पाओगे, वास्तव में expression और situation दोनों इतना फिट बैठते हैं उनके look के साथ की आप इस कैरेक्टर में किसी ओर को imagine ही नहीं कर सकतें।

हाँ ज्यादा मजा आता अगर विक्रम बत्रा के साथ साथ डिम्पल के किरदार को थोड़ा ओर explain किया जाता।

लेकिन चलो फ़िल्म का टाइटल हैं Shershaah, तो कहानी डिस्टर्ब नहीं होनी चाहिए।

और last में डायरेक्शन वो हैं एकदम टॉप लेवल, पाकिस्तान की भारत से कोई नई दुश्मनी तो हैं नहीं लेकिन एक surprise के तौर पर जब कारगिल युद्ध के scenes आते हैं तो हमें एक नई तरीके की लड़ाई दिखाई जाती हैं जो बंदूक के साथ साथ मुँह से लड़ीं जा रहीं हैं।

यहाँ डायरेक्टर साहब का नरेशन कमाल और यूनीक हैं।

रेटिंग

तो यार मेरी तरफ से Shershaah को मिलेंगे 5 में से 5 स्टार्स।

एक स्टार सिद्धार्थ मल्होत्रा के लिए जिन्होंने विक्रम बत्रा के तौर पर जो न्याय किया हैं उसके लिए जितनी तालियाँ बजाओगे उतनी कम पड़ेंगी।

एक स्टार फ़िल्म को URI के बराबर खड़ा करने की कोशिश ना करते हुए अपना यूनीक हटके नरेशन स्टाइल के लिए।

एक स्टार विक्रम बत्रा की personal और professional दोनों जिंदगियों को एक ही कहानी में बिना किसी समझौते के दिखाने वाली दमदार राईटिंग के लिए, डॉयलोग्स और emotions एक complete पैकेज।

एक स्टार सपोर्टिंग cast जो नाम पे नहीं काम पर फोकस करती हैं उसको बेहतरीन तरीके से इस्तेमाल करने के लिए, यहाँ तक कि फ़िल्म में युद्ध के साथ साथ प्यार और रोमांस वाले से न्याय करने के लिए कियारा के कैरेक्टर को रीढ़ की हड्डी के तौर पर इस्तेमाल किया गया हैं।

और एक स्टार बॉलीवुड के नशे में ना डूबकर फ़िल्म को जिस सच्चाई से प्रस्तुत किया गया हैं वो सच में लोगों तक पहुँच जाता हैं।

कोई नकली हीरोपंती नहीं एक असली सिपाही की ज़िंदगी को एकदम सच्चाई से दिखाना वाकई कमाल हैं।

फ़िल्म Shershaah को 12 अगस्त 2021 के दिन रिलीज़ किया गया था और इसे आप अमेज़ॉन प्राइम पर देख सकतें हैं।

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