सूर्यवंशी रिव्यू । Suryavanshi Movie Review in Hindi

एक सीधी और सरल सी बात हैं कि हम लोग फ़िल्में एंटरटेनमेंट के लिए देखते हैं। 2-3 घण्टे जो थिएटर में निकले उसमें दिमाग बाहर की बातों को बिल्कुल भूल जाये और screen ही हमारी नई जिंदगी बन जाए।

नई फिल्म सूर्यवंशी इस काम को पूरी ईमानदारी से करेगी, आपका थिएटर किसी भी शहर में हो लेकिन ढाई घण्टे के लिए आप मुम्बई पहुँच जाओगे और कुछ लोग तो शायद खुद को पुलिस ऑफिसर ही समझने लगे।

लेकिन दोस्त हर बार थिएटर में एक ही चीज को बार बार दिखाया जाएगा तो अगली बार थिएटर में जाने को दिल घबराने लगेगा।

और दिमाग उल्टा आपसे सवाल भी पूछेगा की पैसे पेड़ पे उगते हैं क्या जनाब?

तो चलो हमेशा की तरह बिना वक्त गवाएं चलते हैं Suryavanshi Review पर और बात करतें हैं कि क्या आपको फ़िल्म सूर्यवंशी के लिए अपना वक्त और पैसा देना चाहिए?

Suryavanshi Movie Review in Hindi

Suryavanshi Cast (स्टार कास्ट)

सूर्यवंशी फ़िल्म के लीड कैरेक्टर हैं डीसीपी वीर सूर्यवंशी उर्फ़ सूर्या जिसका कैरेक्टर प्ले कर रहें हैं अक्षय कुमार जो इससे पहले बेल बॉटम और लक्ष्मी जैसी फिल्मों में नजर आ चुके हैं। फ़िल्म में अक्षय कुमार ATS के चीफ़ का कैरेक्टर प्ले कर रहें हैं।

फ़िल्म में इनके साथ रोमांस कर रहीं हैं कैटरीना कैफ जो इनकी बीवी हैं जिसका नाम हैं डॉक्टर रिया सूर्यवंशी, ये पेशे से एक डॉक्टर हैं।

अजय देवगन और रणवीर सिंह फ़िल्म में special appearance देंगे। अजय देवगन जहाँ डीसीपी बाजीराव सिंघम के रूप में होंगे वहीं रणवीर सिंह इंस्पेक्टर संग्राम भालेराव उर्फ़ सिंबा के कैरेक्टर में नज़र आएंगे।

वीर सूर्यवंशी के सीनियर ऑफ़िसर आईजी कबीर श्रॉफ़ का कैरेक्टर प्ले कर रहें हैं जावेद जाफ़री

फ़िल्म में जैकी श्रॉफ का कैरेक्टर लश्कर चीफ़ का हैं जो एक आतंकवादी हैं जिनका नाम हैं ओमार हाफ़िज़गुलशन ग्रोवर जिनके किरदार का नाम हैं कादर उस्मानी, वो भी एक आतंकवादी हैं।

Suryavanshi Story (कहानी)

सूर्यवंशी फ़िल्म की कहानी मुम्बई पर आधारित हैं जहाँ पर कई सालों की प्लानिंग प्लोटिंग के बाद एक बड़ा धमाका होने वाला हैं।

जिसका सीधा कनेक्शन बॉर्डर के उस पार बैठे कुछ मक्कार और बेवकूफ type के लोगों के साथ जुड़ा हुआ हैं।

धमाका होगा कैसे? इसको समझने से पहले आप ज़रा स्लीपर सेल का मतलब जान लो क्योंकि आगे जरूरत पड़ेगी।

पड़ोस के अंकल, गली में खड़ा सब्जी वाला, सुबह घर में दूध लाने वाले भईया या फिर बचपन से haircut करने वाला नाई, इनमें से कोई भी स्लीपर सेल हो सकता हैं।

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ये वो लोग हैं जिन्हें स्पेशल ट्रेनिंग मिली हुई हैं जिससे वो कई सालों तक अपनी पहचान छुपाकर एकदम मामूली जिंदगी जीने का नाटक कर सकतें हैं।

और फिर बोर्डर पार से एक फ़ोन आएगा और ये अपनी आम जिंदगी छोड़ कर पूरे शहर को हमेशा हमेशा के लिए गहरी नींद में सुलाने की प्लानिंग कर लेंगे।

ये घटिया मिशन सम्भव भी हो जाता अगर मिस्टर सूर्यवंशी इस स्लीपर सेल के पीछे ना पड़ते।

सर जी एटीएस के लीडर हैं जिसका काम ही हैं देश में होने वाले आतंकवादी गतिविधियों को रोकना। लेकिन इस बार हमला एक, दो, तीन नहीं बल्कि पूरे सात होने वाले हैं।

ये सात धमाके पूरे मुंबई शहर का नक्शा बदलने के लिए काफ़ी हैं।

यहाँ चलता हैं सूर्यवंशी का लोमड़ी जितना तेज़ दिमाग और दो पुराने सुपरहीरो प्रकट हो जाते हैं शहर को बचाने।

आला रे आला सिम्बा और आता माजी सटकली सिंघम, देखो दोस्त सूर्यवंशी फ़िल्म को एकदम मसाला type फिल्मों की तरह बनाया गया हैं।

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जो जो audience ने डिमांड की थी रोहित शेट्टी से, उन्होंने वो वो अच्छे से प्रस्तुत भी किया हैं, एक्शन scenes हैं, जोरदार डॉयलोग्स भी हैं, देश भक्ति और हिन्दू मुसलमान वाला सोशल मैसेज भी।

और साथ में कहानी को रंगीन बनाने के लिए पीछे से कैटरीना कैफ और अक्षय कुमार का रोमांस भी डाल दिया गया हैं फ़िल्म में।

कुछ लोग बोल सकतें हैं कि फ़िल्म में काफ़ी सारे scenes हैं जिनका लॉजिक से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं हैं।

आपकी बात सच हैं लेकिन ये मास सिनेमा हैं और यहाँ दिमाग को छुट्टी पर भेजना ही पड़ता हैं, ये पहली शर्त होती हैं ऐसी फिल्मों को देखने की।

और फिर सूर्यवंशी फ़िल्म को बना रहें हैं रोहित शेट्टी जिनके सिनेमा में गाड़ी रॉड पर कम और हवा में उड़ती ज्यादा नजर आती हैं, साथ ही पुरानी दोनों फिल्मों के लेवल को इस फ़िल्म के साथ थोड़ा ओर ऊपर ले जाने का प्रयास भी किया गया हैं।

तो गली मोहल्ले वाले गुंडे अब इंटरनेशनल आतंकवादी में बदल गए और लॉजिक जैसे शब्द मास और एक्शन में बदल गए हैं।

सूर्यवंशी फ़िल्म की कहानी predictable हैं, अंत में कौन जीतेगा और कौन बुरी तरह पिटेगा? हम पहले से ही जानते हैं।

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कुछ भी दिमाग को चक्करघिन्नी करने वाले ट्विस्ट्स और टर्न्स बिल्कुल नहीं मिलेंगे इस फ़िल्म में, एकदम सरल और साधारण।

लेकिन कहानी दिखाने का तरीका काफ़ी मजेदार हैं, जैसे फ़िल्म शुरू होते ही एकदम सीरियस टोन पर बदले को बीच में डालकर आगे कुछ तो बड़ा होने वाला हैं, ऐसा महसूस होने लगता हैं।

साथ ही, विलेन के रोल में इतने कमाल के कलाकारों को cast किया गया हैं जो सच में डराता हैं की इस बार अपना हीरो कहीं हिट होने की जगह पिट तो नहीं जाएगा।

सूर्यवंशी फ़िल्म के नेगेटिव्ज कैरेक्टर्स काफ़ी दमदार हैं।

और फिर फ़िल्म के अंत में जब रणवीर, अक्षय और अजय देवगन, तीनों एक साथ screen पर आ जाएंगे तो excitement को कण्ट्रोल कर पाना बड़ा मुश्किल होगा।

वहीं तो असली एंटरटेनमेंट होता हैं, अपने मनपसंद एक्टर्स को screen पर देखना।

लेकिन फ़िल्म का असली दुश्मन हैं वो जो फ़िल्म के रिलीज़ होने से पहले ही सामने आ गया था – 4 मिनट का ट्रेलर।

देखो दोस्त, अगर आपको वो 4 मिनट अच्छे से याद हैं तो फ़िल्म देखने का कोई मतलब ही नहीं हैं। उस ट्रेलर में वो सब कुछ हैं जो आप थिएटर में देखना चाहते हो।

सूर्यवंशी फ़िल्म का सबसे बड़ा surprise factor था सिम्बा और सिंघम को क्लाइमेक्स में लाना, उसे पूरी तरह ट्रेलर में दिखाया जा चुका था।

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इसीलिए थिएटर में जब इन हीरोज की entry हुई तो अंदर से वो आग बाहर निकली ही नहीं जिसकी सबको उम्मीद थी।

और दूसरी गड़बड़ ये हैं कि फ़िल्म में अक्षय कुमार ने काम बहुत बढ़िया किया हैं, बेशक वो कमाल के एक्टर हैं लेकिन फ़िल्म के एक एक scene में अक्षय कुमार ही नजर आ रहें हैं, सूर्यवंशी का कैरेक्टर कहीं दब सा गया हैं।

जैसे सिंघम का अपना अलग स्टाइल हैं वो डांस स्टेप जो अगर कहीं दिख जाए तो मुँह से सिंघम निकल ही जायेगा।

और फिर सिम्बा की कॉमेडी तो वर्ल्ड वाइड फ़ेमस हैं, उस बन्दे के जोक्स ही काफ़ी हैं सिम्बा की याद दिलाने के लिए।

लेकिन सूर्यवंशी के साथ ऐसा कुछ भी नहीं हैं, वो सिंबा को तरह कॉमेडी भी करते हैं और सिंघम की तरह मारधाड़ भी। लेकिन अपना खुद का अलग एक्स फ़ेक्टर मिसिंग हैं फ़िल्म में।

और एक last चीज़ ये भी हैं कि हिन्दू मुस्लिम वाले एंगल को सोशल मैसेज के साथ फ़िल्म में डाला गया हैं जो अच्छा हैं लेकिन उसको किस तरह दिखाना हैं? उसमें डायरेक्टर साहब थोड़ा चूक गए।

सब कुछ बनावटी सा लगता हैं, real वाला कुछ भी महसूस नहीं होता। इस मैसेज की जो feel आनी चाहिए थी वो नदारद हैं।

तो last में सीधी सिंपल बात ये की थिएटर चले जाओ, मजा आएगा इस बात में कोई शक नहीं हैं। लेकिन कुछ भी नया नहीं मिलेगा या फिर अलग type का सिनेमा जो आपके होश उडादे, इस तरह की उम्मीद मत करना।

एक्टिंग और परफॉर्मेंस

एक्टिंग में रणवीर सिंह के कॉमेडी डॉयलोग्स एकदम अलग ही लेवल के हैं, ये बन्दा situational comedy करने में उस्ताद हैं।

मतलब सामने अगर बिना कुछ बोले खड़ा भी हो जाएगा तो भी आप हँस पड़ोगे।

अजय देवगन का कैमियो थोड़ा छोटा हैं लेकिन महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनके साथ ही मेकर्स ने सिंघम के तीसरे भाग की तरफ़ इशारा कर दिया हैं।

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सूर्यवंशी फ़िल्म में कैटरीना कैफ़ के पास ज्यादा कुछ था नहीं करने को लेकिन टिप टिप बरसा पानी में मैडम ने आँखों में आग लगा दी, फुल हॉटनेस का तड़का।

बाकी अगर ये फ़िल्म में ना भी होती तो कहानी को ज्यादा फ़र्क नहीं पड़ता।

रेटिंग

मेरी तरफ़ से सूर्यवंशी फ़िल्म को 5 में से 3.5 स्टार्स।

एक स्टार तो predictable कहानी जिससे भले ही हम पहले से ही वाकिफ़ हैं लेकिन उसको भी दिलचस्प तरीक़े से ढाई घण्टे चलाने वाले शानदार डायरेक्शन के लिए।

एक स्टार फ़िल्म में दमदार एक्शन scenes और situational comedy जिसमें वास्तव में हँसी आती हैं, उसके लिए।

एक स्टार अजय, अक्षय और रणवीर की तिगड़ी को एक साथ screen पर देखकर जो एंटरटेनमेंट फ़ेक्टर दिल को सुकून पहुँचाता हैं, उसके लिए।

और आधा स्टार नेगेटिव्ज कैरेक्टर्स में जिन एक्टर्स को cast किया गया हैं उनके लिए।

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वैसे भी वो फ़िल्म मजेदार होती हैं जिसमें विलेन हीरो की टक्कर का लगता हैं।

बात करूँ नेगेटिव्ज की तो एक स्टार कटेगा फ़िल्म में कुछ भी नया ना डालने के लिए, फ़िल्म मेकर्स ने एकदम सेफ़ खेला, जो लोगों को चाहिए वो दिखा दिया, बाकी फिल्मों से अलग करने की कोशिश नहीं कि।

और आधा स्टार अक्षय कुमार को अक्षय कुमार के तौर पर प्रस्तुत करना फ़िल्म का काफ़ी नुकसान कर गया। वीर सूर्यवंशी का कैरेक्टर दिमाग में एक अलग स्पेशल जगह बनाने में विफल हो गया।

देखो दोस्त, choice आपको करनी हैं, पैसा बचाना हैं और नेटफ्लिक्स का subscription हैं तो फ़िल्म को जरूर देखों, मजा भी आएगा।

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