Thalaivi Movie Review in Hindi: Cast, Story, Rating

एक्टिंग को हर कोई अपने तरीके से आंकता हैं, किसी भी हीरो या हीरोइन की एक्टिंग को मापने का कोई तय पैरामीटर नहीं होता हैं।

लेकिन आज कुछ भी सामने रख दो क्योंकि कंगना रनोत ने सारे चैलेंजेस पार कर लिए हैं बॉस।

Thalaivi जिसका हर किसी को इंतज़ार था, फाइनली रिलीज़ हो गयी हैं, यकीन मानों इस फ़िल्म को ना देखने में सिर्फ आपका नुकसान होने वाला हैं फ़िल्म मेकर्स का बिल्कुल नहीं।

फ़िल्म का जब टीज़र आया तो मजाक भी उड़ाया गया फिर जब ट्रैलर रिलीज़ हुआ तो उम्मीदों का एक नया लेवल सेट हुआ और फाइनली जब Thalaivi फ़िल्म रिलीज़ हुई तो हर किसी को गर्व हुआ कि इंडियन सिनेमा में कंगना जैसे कलाकार मौजूद हैं।

Thalaivi का एक लाइन में रिव्यू करूँ तो एक ऐसा अनुभव जिसे हमेशा याद रखा जाएगा। बॉयोपिक तो बहुत सारी बनी हैं पहले भी जैसे 83 film लेकिन कंगना इसे एक लेवल ओर ऊपर ले गयी हैं।

फ़िल्म में कमी ढूँढते रह जाओगे और फ़िल्म हो जाएगी ख़त्म, आसान शब्दों में कहूँ तो सिनेमा जीत गया।

फ़िल्मी पर्दे और real life के बीच के फ़र्क को Thalaivi फ़िल्म ने एकदम जीरो कर दिया हैं।

इस Thalaivi review में हम बात करेंगे फ़िल्म की स्टार कास्ट, स्टोरी, एक्टिंग और बहुत सारी चीज़ों के बारे में।

Thalaivi Movie Review in Hindi: Cast, Story, Rating

Thalaivi Cast (स्टार कास्ट)

  • कंगना रनोत – जे. जयललिता
  • अरविंद स्वामी – एम.जे. रामचन्द्रन / MGR
  • नासिर – एम. करुणा
  • भाग्यश्री – संध्या (जयललिता की माँ)
  • राज अरुण – आर. एन. वीरप्पन
  • मधु – वी. एन. जानकी रामचन्द्रन (MGR की बीवी)
  • राधा रवि – एम.आर. राधा
  • थम्बी रमैया – माधवन
  • ए.आर. मनिकन्दन – मूर्ति
  • फ़्लोरा जैकब – इंदिरा गांधी (प्रधानमंत्री)
  • ए. राजीव कुमार – राजीव गांधी (प्रधानमंत्री)

Thalaivi Details (जानकारी)

  • डायरेक्टर – ए.एल. विजय
  • राईटर – मदन कार्की (तमिल), रजत अरोड़ा (हिंदी)
  • आधारित – अजयन बाला की किताब Thalaivii
  • सिनेमेटोग्राफी – विशाल विट्ठल
  • म्यूजिक – जी. वी. प्रकाश कुमार
  • रिलीज़ डेट – 10 सितंबर 2021
  • रनिंग टाइम – 153 मिनट
  • बजट – 100 करोड़
  • बॉक्स ऑफिस – 4.75 करोड़ (पहले हफ़्ते में)

Thalaivi Story (कहानी)

Thalaivi फ़िल्म की कहानी हैं तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री और सबसे पॉपुलर एक्ट्रेस में से एक जे. जयललिता के बारे में।

हमेशा हमने इनको कैमरे के सामने देखा हैं लेकिन Thalaivi का फोकस कैमरे के पीछे हैं एक सीक्रेट व्यक्तिगत जिंदगी।

बचपन से लेकर राज्य की सबसे शक्तिशाली कुर्सी पर बैठने की यह एक जर्नी हैं। साँप सीढ़ी के खेल की तरह बीच में कई मुश्किल विलेन और हालात आए लेकिन जिंदगी का ये खेल वक्त के साथ आगे बढ़ता रहा।

सबसे अहम सवाल एक एक्ट्रेस जिसको लोग अपने सपनों में देखते हैं वो क्यों सब कुछ छोड़कर पॉलिटिक्स की उन गलियों में जाएगी जहाँ सिर्फ और सिर्फ मर्द रहा करते हैं।

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देखो दोस्त, अगर कंगना के नजरिए से देखा जाए तो ये किसी मौके पे चोके जैसा ही हैं, क्योंकि जयललिता की व्यक्तिगत जिंदगी इतनी दिलचस्प और controversial थी कि उसको एक फ़िल्म की शक्ल देना काफ़ी आसान था।

अब जबकि फ़िल्म की कहानी ही इतनी जबरदस्त हो तो एक्टर को एक ऐसा रोल प्ले करने का गोल्डन चांस मिल जाता हैं जो इतिहास में एक उदाहरण के तौर पर जाए जिसको दुनियाँ कॉपी करने की कोशिशें करें।

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एक बड़ा उदाहरण सेट किया जिसकी बराबरी करने में आज तक सारी फ़िल्में और वेब सीरीज़ लगी हुई हैं।

शेरशाह और सरदार उद्दम भी इन्ही में से कुछ नाम हैं।

बस कंगना का उसी लेवल का परफॉर्मेंस देखने को मिलेगा Thalaivi में।

जयललिता की तरह दिखना जरूरी नहीं हैं बल्कि वो जयललिता बन चुकी हैं। आप ढूँढते रह जाओगे लेकिन वो सोशल मीडिया वाली कंगना आपको फ़िल्म में दिखेंगी ही नही।

एक ही फ़िल्म में आपको ऐसा महसूस होगा मानों आपने कंगना के चार पांच किरदारों को एक साथ देख लिया हो।

इतना ज्यादा एक्टिंग वेरिएशन और टैलेंट हैं जिसमें बॉलीवुड की 10-12 पापा की परियों का कैरियर बन जायेगा।

एक एक्टर के लिए इससे बड़ा achievement ओर कुछ नहीं हो सकता की फ़िल्म देखने के बाद जब भी जयललिता के बारे में पढोगे या सुनोगे तो कंगना का चेहरा आंखों के सामने आ जायेगा।

चलो अब तारीफों को थोड़ा साइड में रखते हैं और Thalaivi review पर वापस आते हैं।

दोस्त काफ़ी वक्त के बाद देखा होगा आपने किसी फिल्म का इतना पॉवरफुल introduction scene, आंखों में गुस्सा और महाभारत की संसद से तुलना करता एक ख़तरनाक डायलॉग।

वो कहते हैं ना कि “first impression is the last impression” बस कुछ वैसा ही Thalaivi शुरू होती हैं एक धमाकेदार impression के साथ।

फ़िल्म का बेस्ट पार्ट सिनेमा और पॉलिटिक्स दोनों के बीच में एक परफेक्ट बेलेंस देखने को मिलेगा।

फ़िल्म को फ़िल्म के तौर पर दिखाने के लिए म्यूजिक हैं गाने हैं वहीं राजनीति की feel के लिए चालबाजी और आर पार की दुश्मनी भी हैं।

और हाँ फ़िल्म का टाइटल भले ही Thalaivi हो लेकिन ये one women show बिल्कुल नहीं हैं उस टिपिकल बॉलीवुड लॉजिक के जैसे नहीं हैं जहाँ एक हीरो बाकी सब जीरो हो जाते हैं, Thalaivi एक टीम एफर्ट हैं।

MGR का किरदार फ़िल्म में कंगना के बराबर हैं अरविंद स्वामी एक तरह गायब से हो गए हैं यहाँ।

फ़िल्म में आपको सिर्फ MGR नजर आएंगे एक फ़ेमस पर्सनेलिटी का एकदम परफेक्ट recreation हैं ये।

साथ में कुछ सपोर्टिंग कैरेक्टर्स जिनका good और evil साइड सिर्फ बताया ही नहीं बल्कि दिखाया भी जाता हैं जिससे आप कहानी से जुड़ से जाते हो।

फ़िल्म के मेकर्स ने दो जरूरी चीज़ों का काफ़ी ध्यान रखा हैं जहाँ एक छोटी सी गलती पूरी फिल्म पर भारी पड़ सकती थी।

पहली चीज तो उम्र बढ़ने वाला प्रोसेस, उसको हम फ़िल्म देखने के दौरान पूरे ढाई घण्टे आँखों के सामने से गुजरते हुए वाकई महसूस करते हैं।

वरना सत्यमेव जयते 2 जैसी फिल्म्स में तो पता ही नहीं चलता कौन बाप हैं और कौन बेटा?

एक तरफ कपड़ों का रंग रंगीन से सफ़ेद हो जाता हैं तो वहीं दूसरी ओर चेहरे और बालों को मेकअप की मदद से जवान से बूढ़ा ट्रांसफॉर्मेशन, सब कुछ इतना smoothly किया गया हैं जो एकदम real और genuine लगता हैं।

और दूसरी जरूरी चीज़ MGR और जयललिता के personal relationship को बड़े ही ध्यानपूर्वक तरीके से संभाला गया हैं।

बिना किसी controversy को हवा दिए जितना जरूरी था वो आपको दिखा भी दिया वो भी बिना किसी मिर्च मसाले के।

अभी सबसे अहम चीज़ जो किसी बॉयोपिक को हिट या फ्लॉप किस कैटेगरी में डालना हैं? उसका फैसला करती हैं वो हैं इमोशन्स।

वो real life के बराबर आ पाए या नहीं तो इसका जवाब हैं हाँ।

उल्टा बोनस ये था कि फ़िल्म में कई scenes तो ऐसे हैं जो जयललिता के कैरेक्टर और कंगना की personal life के बीच एक लकीर सी बना देते हैं।

दोनों का एटीट्यूड एक दूसरे का हूबहू फोटोकॉपी जैसा हैं इसीलिए कंगना जो डॉयलोग्स बोलती हैं उसमें जयललिता की पर्सनलिटी नजर आती हैं जो फ़िल्म को अगले स्तर तक लेके जाती हैं।

Thalaivi एक पॉवरफुल कॉन्टेन्ट पर आधारित सिनेमा का एक बेहतरीन उदाहरण हैं जिसे अमिताभ बच्चन के शब्दों में कहें तो टिपिकल मसाला बॉलीवुड फिल्मों के रिश्ते में बाप लगती हैं।

और हाँ, बुरा लगा कि कंगना के कैरियर की बेस्ट परफॉर्मेंस multiplex cinema chains के साथ हुई कॉन्ट्रोवर्सी के कारण थिएटर तक नहीं पहुँच पाई।

लेकिन ओटीटी की दुनियाँ अब थिएटर जैसी ही आम बन चुकी हैं जहाँ इस फ़िल्म ने जोरो शोरों से अपना डंका बजाया हैं।

Thalaivi Review: रेटिंग

तो यार मेरी तरफ़ से Thalaivi फ़िल्म को 5 में से 4 स्टार्स।

एक स्टार तो फ़िल्म के मेकर्स के नाम जिन्होंने बराबर जोश के साथ फ़िल्म को शुरुआत से लेकर अंत तक ख़त्म किया वहीं पॉलिटिक्स और सिनेमा के बीच एक परफेक्ट बैलेंस को भी बनाये रखा।

एक स्टार ढाई घण्टे के छोटे से टाइम फ्रेम में सिर्फ जयललिता नहीं बल्कि MGR और कुछ साइड कैरेक्टर्स को पूरी डिटेलिंग के साथ प्रस्तुत करने के लिए।

एक स्टार मेकअप और सेट्स का बदलता रंग, Thalaivi की ज़िंदगी का बचपन से लेकर पॉलिटिक्स का हर चेप्टर एकदम genuine और authentic लगता हैं।

एक स्टार कंगना की बेस्ट एक्टिंग स्किल्स को बाहर लाने वाला डायरेक्शन जिसमें टॉप लेवल की वेरिएशन दिखाई देती हैं।

साथ में अरविंद स्वामी का बैकग्राउंड में स्ट्रॉन्ग सपोर्ट, उसके लिये।

वहीं अगर नेगेटिव्ज की बात करूँ तो एक स्टार कटेगा जयललिता को अम्मा के तौर पर ज्यादा explore नहीं किया गया जिसकी वजह से फ़िल्म का अंत थोड़ा अधूरा सा महसूस होता हैं।

ये part थोड़ा missing रह गया गुरु।

लेकिन दोस्त इन छोटी मोटी कमियों को नजरअंदाज करो और फ़िल्म को अभी अनुभव करो फ़टाफ़ट क्योंकि ना जाने फिर अगली बार इस तरह का अनुभव कब मिलेगा?

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